इस संसार मे प्राकृति के सिवा कुछ भी शास्वत नहीं है। परंतु मनुष्य जीवन मे कुछ चीज़ें ऐसी है जो जीवनपर्यंत चलता साथ रहते है।
-शत्रु-
मित्र- यह जीवन के ऐसे पहलू है जो हर मनुष्य के जीवन मे सदैव बने रहते
हैं। बिरले ही मनुष्य होंगे जो अजातशत्रु हों। अगर व्यक्ति सांसारिक जीवन
व्यतीत कर रहा है तो उसके जीवन में शत्रुओं और मित्रों का होना स्वाभाविक
है।
मान- अपमान-- मनुष्य के जीवन में जहाँ यश है वह
अपयश भी है। अगर व्यक्ति की ख्याति है और उसे समाज का एक वर्ग पसन्द करता
है तो पूरी संभावना है की समाज का एक वर्ग उसे पसंद न करता हो क्योंकि
संसार मे रहने वाले सभी मनुष्य भिन्न- भिन्न मानसिकता के होते हैं।
व्यक्ति को न कभी मान का अभिमान करना चाहिये और न ही अपमान का खेद। दोनो एक
सिक्के के दो पहलू हैं।
दु:ख- सुख-- अगर जीवन मे
सकरात्मकता है तो नकारात्मकता भी है। उसी प्रकार अगर जीवन में सुख है तो
दु:ख भी होगा, लेकिन हमें हर परिस्थिति में एक समान रहना चाहिए न ही सुख
में अत्यधिक खुश होना चाहिए और न ही दु:ख में मनोबल खोना चाहिए, तभी एक
संतुलित एवं शान्तिपूर्ण जीवन व्यतीत किया जा सकता है।
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