Thursday, 28 December 2017

नारी।

नारी उपकार है
सत्कार कर
नारी है तो बलिदान है
नारी से उत्थान है
नारी से सृजन है
नारी है तो आंगन गुंजन है
नारी से ही वीरता है
नारी से ही मधुरता है
नारी है तो रोशन
नारी है तो गुलशन
नारी बल है
नारी जल है
नारी थल है
माटी भी नारी
सती भी नारी
धूप भी नारी
छाओं भी नारी
नारी से युवा है
नारी से दुआ है
नारी महान है
घर घर की शान है
नारी वरदान है
नारी का सम्मान कर
नारी को नमस्कार कर
नारी उपकार है
सत्कार कर।

Sunday, 26 November 2017

गौरव।

आज 26/11 के दिन करीब एक दशक पहले बम्बई में जो आतंकी हमला हुआ उसमें न जाने कितने ही भारत माँ के वीर सपूतों ने अपना बलिदान दिया, चाहे वह भारत माँ का बेटा एक सैनिक हो या चाय वाला या स्टेशन मास्टर या फिर कोई पुलिस का जवान ही क्यों न हो। सबने इस घटना पर शोक तो मनाया पर आज लगभग 10 साल बाद शायद ही किसी को याद होगा कि आज के दिन क्या हुआ था, अधिकांश अपनी अपनी ज़िंदगी मे व्यस्त हैं, सबसे ज्यादा खेद तो तब होता है जब संदीप उन्नीकृष्णन, विजय सालस्कर,विनोद कमले जैसे वीर सपूतो के देश का युवा सो रहा है, उसे अपने फेसबुक , व्हाट्सएप्प के स्टेटस अपडेट करना तो याद है, पर यह याद नहीं कि आज के दिन न जाने कितने भारत माँ के बेटों ने उपना बलिदान  बिना एक पल सोचें दिया था। क्या सोचा किसी ने एक बार भी की बस आज के लिए आज के ही दिन उन वीरों को याद कर लें। शायद नहीं हम क्यों करें उनका काम था शहीद होने वो होगये उनकी यही तो ड्यूटी थी हमें इससे क्या मतलब। बात शहीदों की आई है तो एक बात और बताता चलता हूं , फौजी की  ज़िंदगी शहीद होने के लिए नहीं होती उसे जीने का पूरा अधिकार है, पर हम यह मान कर बैठे है कि फौजी है शहीद ही होगा। खैर आपको इससे क्या जाने दीजिए। अजी हमारा काम तो 15अगस्त और 26जनवरी के दिन तिरंगा फहरा कर और बड़ी बड़ी बातें कर के खत्म हो जाता है, इससे ज्यादा हम कर भी क्या सकते है, और करे क्यों हमने ठेका थोड़ी ले रखा है, लगे रहने दो लोगों को। कभी मौका मिला तो किसी दिन फेसबुक पर होशियारी दिखा देंगे या किसी पोस्ट को शेयर कर देंगे बहुत है उतना। लेकिन नहीं उससे नहीं बन जाते आप देशभक्त और ये कर के अगर आप अपने आपको देशभक्त कहते है तो देसभक्त शब्द का अपमान कर रहे है आप।
मैंने अपने एक साथी से पूछा आज क्या है? जवाब सुनकर दंग रह था मैं उसने मुझे बताया कि आज के दिन मैंने पिछले साल अपना नया आईफोन लिया था, उसे तो यह भी याद नहीं या शायद पता ही नहीं कि आज 26/11 के दिन कौन आया था क्या कर गया क्या हुआ?
लगभग एक दशक पहले 10 नमूनें आए थे भारत और तबाही मचा दी। बम्बई- न सोने वाले शहर  को कुछ घंटों में मौन कर दिया पर याद है किसी को? करना क्या है याद कर के ? सवाल तोह जायज है कि याद कर भी लिए तो क्या? जवाब में कहूंगा याद करने से फर्क नहीं पड़ता महसूस करने से पड़ता है,जरूरी नहीं फौज में रहकर सेवा करें जरूरी यह है कि करें और पूरे जोश और जज्बे से करें। स्टेशन ,चाय की दुकानों पर काम करने वाले फेरीवाले ये सब फौज में तो नहीं थे,पर वे इस परिस्थिति सर लड़े, उन्होंने हर संभव मदद की। मैं यह नहीं कह रहा कि आप सारी दुर्घटनाएं याद रखें पर आप जिस देश के लाल हैं उसका गौरव आपमें हो। मैं यह लिख कर सिर्फ यह बताना चाहता हु की हर नागरिक अपनी अपनी एहमियत रखता है, कोई काम नहीं कोई ज्यादा नहीं।
बाकी  मैं आप पर छोड़ता हूँ।
                            जीवेश नंदन।

Wednesday, 27 September 2017

उठो समझो

हमारा देश कई जातियों और सम्प्रदायों में बंटा हुआ है,और हम बखूबी उनका पालन भी कर रहे है,एक दो आवाज उठाने वाले है भी लेकिन उनको भी जातिवाद का न तो पूरा ज्ञान है और न ही उनके इरादे इतने बुलंद है कि वे क्रांति ला सके।
हम इन सबको निभा तोह रहे है पर इसका मूल कारण जाने बिना और यही वजह है जिसकी वजह से कई शर्मसार घटनाए हो चुकी है। हम लोगो को जगाने के लिए रायबहादुर तोह बने हुए है परंतु उसे अपनी निजी जिंदगी में ढाल नही पा रहे,ढालेंगे भी कैसे हमे पता तो हो कि आखिर ये है क्या। हमें पता ही नही है ये जातियां है क्या कहाँ से आई है क्यों है ये जातियां। बस अंधाधुन्द उनका पालन कर रहे है। चलिए एक प्रकाश डालते है।
जातियां प्राचीन काल मे हमारे विद्वानों ने कर्म व्यवस्था के हिसाब से बनाई थी।
जैसे - 1)शूद्र- इस वर्ण में उन लोगो को डाल गया था जो शारीरिक श्रम करने में अत्यंत समर्थ थे,और काम करने में काफी आगे थे और मेहनत करते थे, परंतु इन्हें पुराणों का या यूं कह ले सामाजिक ज्ञान उतना नही था। ये थे जो शूद्र वर्ग में आए।
2)वैश्य-इस वर्ग में उन लोगो को रखा गया जो लेन देन में कुशल थे और लेखा जोखा रख सकते थे।
3)क्षत्रिय- इस वर्ग में वो लोग आए जो विचारशील थे,जिनमे त्याग की भावना थी,जिनको अपने जीवन से प्रेम न था, देखा जाए तोह हमारे देश का हर एक सैनिक क्षत्रिय है चाहे उसकी जाती कोई भी हो।
4)ब्राह्मण-इस वर्ग में उन लोगो को रखा गया था जो कामनाओं से मुक्त थे एयर जो लोक हित के लिए अपना जीवन जीते थे।
हमे भूलना नही चाहिए कि हमारे राष्ट्रपति भी एक नीचे परिवार से है ,आज हमारे देश का सबसे युवा आई ए एस अधिकारी एक रिक्शा चालक का पुत्र है, हमारे फ़िल्म के महान अभिनेता नाना पाटेकर जैसे कुछ लोग बड़े ही महत्वपूर्ण उदाहरण है।
कभी भी कोई विशेष वर्ग नही हुआ करता था लोगो को उनके कर्मों के हिसाब से हर वर्ग बांटा गया था। लेकिन आज हमने उपज वर्गीकरण कर लिया है अपने आपको ऊंचा नीचा बना लिए है। जानवरो जैसे कृत्य करके हम खुद को ऊंची जाती का मान रहे हैं, लेकिन सच तो यह है कि चाहे कोई व्यक्ति शुद्र हो,ब्राह्मण हो,क्षत्रिय हो या फिर वैश्य हो सबको अपनी काबिलियत और काम करने की क्षमता के अनुसार बांटा गया था।
और ऐसा जरूरी नही है कि ब्राह्मण के घर ब्राह्मण ही पैदा हो या शूद्र के घर शुद्र,व्यक्ति की जाती उसके किसी परंबद्ध परिवार में पैदा होने से नही होती वरन उसके कर्मो से होती है।
ये समय है इन सब रूढ़िवादी मान्यताओं को तोड़ कर चीज़ों का सही मतलब समझ कर हम अग्रसर हो अपने उत्थान के लियेऔर अपने साथ देश और संसार का उत्थान करे। जातिवाद भूल कर "सब एक है" का नारा उठा कर आगे बढ़े।
आशा करता हु इसे सिर्फ पढ़ा न जाए लोगो को समझाया जाए और क्रांति लाई जाए।
सम्पूर्ण क्रांति अब नारा है
भावी इतिहास तुम्हारा है
ये नखत अमा के बुझते हैं
सारा आकाश तुम्हारा है।
आपके विचारों का खुले हृदय से स्वागत है।
धन्यवाद🙏

Friday, 15 September 2017

Poem(ईमानदार)

पुण्य कर्मों के यहाँ तुम देखो कई प्रकार,
करना पड़ता उनके लिए कठिनाई का समंदर पार,
पर न मानना तुम कभी भी हार
जो टिका है वही हुआ है भंवर के पार
देश के ईमान के बनो तुम पहरेदार
फिर ये दुनिया कहेगी तुमको भी ईमानदार
आलोचना से न डरना,तुम भरो मजबूत हुंकार
सीखो उस हिमालय से जो झेलता सैकड़ो वार,
फिर भी खड़ा शान से,देखो अचल अडिग ईमानदार।

Tuesday, 12 September 2017

जिम्मेदारी

इस देश के संसार के बन जो तुम श्रृंगार
हो सकेगा तभी मुमकिन जब बन जाओगे जिम्मेदार
दृढ़ कर लो संकल्प अपने न मानो कभी तुम हार
एक दिन दुनिया करेगी तुम्हारी ही जय जय कार
हो सकेगा तभी मुमकिन जब बन जाओगे जिम्मेदार
उठा लो चुनोतियो का अपने सर पर भार
कठिनाइयों पर तुम करो साहस से अपने वार
मष्तिस्क के अपने कुविचारों को दो तुम मार
कर लो हौसले बुलंद अपने न मानो कभी तुम हार
हो सकेगा तभी मुमकिन जब बन जाओगे तुम जिम्मेदार ।

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