हमारा देश कई जातियों और सम्प्रदायों में बंटा हुआ है,और हम बखूबी उनका पालन भी कर रहे है,एक दो आवाज उठाने वाले है भी लेकिन उनको भी जातिवाद का न तो पूरा ज्ञान है और न ही उनके इरादे इतने बुलंद है कि वे क्रांति ला सके।
हम इन सबको निभा तोह रहे है पर इसका मूल कारण जाने बिना और यही वजह है जिसकी वजह से कई शर्मसार घटनाए हो चुकी है। हम लोगो को जगाने के लिए रायबहादुर तोह बने हुए है परंतु उसे अपनी निजी जिंदगी में ढाल नही पा रहे,ढालेंगे भी कैसे हमे पता तो हो कि आखिर ये है क्या। हमें पता ही नही है ये जातियां है क्या कहाँ से आई है क्यों है ये जातियां। बस अंधाधुन्द उनका पालन कर रहे है। चलिए एक प्रकाश डालते है।
जातियां प्राचीन काल मे हमारे विद्वानों ने कर्म व्यवस्था के हिसाब से बनाई थी।
जैसे - 1)शूद्र- इस वर्ण में उन लोगो को डाल गया था जो शारीरिक श्रम करने में अत्यंत समर्थ थे,और काम करने में काफी आगे थे और मेहनत करते थे, परंतु इन्हें पुराणों का या यूं कह ले सामाजिक ज्ञान उतना नही था। ये थे जो शूद्र वर्ग में आए।
2)वैश्य-इस वर्ग में उन लोगो को रखा गया जो लेन देन में कुशल थे और लेखा जोखा रख सकते थे।
3)क्षत्रिय- इस वर्ग में वो लोग आए जो विचारशील थे,जिनमे त्याग की भावना थी,जिनको अपने जीवन से प्रेम न था, देखा जाए तोह हमारे देश का हर एक सैनिक क्षत्रिय है चाहे उसकी जाती कोई भी हो।
4)ब्राह्मण-इस वर्ग में उन लोगो को रखा गया था जो कामनाओं से मुक्त थे एयर जो लोक हित के लिए अपना जीवन जीते थे।
हमे भूलना नही चाहिए कि हमारे राष्ट्रपति भी एक नीचे परिवार से है ,आज हमारे देश का सबसे युवा आई ए एस अधिकारी एक रिक्शा चालक का पुत्र है, हमारे फ़िल्म के महान अभिनेता नाना पाटेकर जैसे कुछ लोग बड़े ही महत्वपूर्ण उदाहरण है।
कभी भी कोई विशेष वर्ग नही हुआ करता था लोगो को उनके कर्मों के हिसाब से हर वर्ग बांटा गया था। लेकिन आज हमने उपज वर्गीकरण कर लिया है अपने आपको ऊंचा नीचा बना लिए है। जानवरो जैसे कृत्य करके हम खुद को ऊंची जाती का मान रहे हैं, लेकिन सच तो यह है कि चाहे कोई व्यक्ति शुद्र हो,ब्राह्मण हो,क्षत्रिय हो या फिर वैश्य हो सबको अपनी काबिलियत और काम करने की क्षमता के अनुसार बांटा गया था।
और ऐसा जरूरी नही है कि ब्राह्मण के घर ब्राह्मण ही पैदा हो या शूद्र के घर शुद्र,व्यक्ति की जाती उसके किसी परंबद्ध परिवार में पैदा होने से नही होती वरन उसके कर्मो से होती है।
ये समय है इन सब रूढ़िवादी मान्यताओं को तोड़ कर चीज़ों का सही मतलब समझ कर हम अग्रसर हो अपने उत्थान के लियेऔर अपने साथ देश और संसार का उत्थान करे। जातिवाद भूल कर "सब एक है" का नारा उठा कर आगे बढ़े।
आशा करता हु इसे सिर्फ पढ़ा न जाए लोगो को समझाया जाए और क्रांति लाई जाए।
सम्पूर्ण क्रांति अब नारा है
भावी इतिहास तुम्हारा है
ये नखत अमा के बुझते हैं
सारा आकाश तुम्हारा है।
आपके विचारों का खुले हृदय से स्वागत है।
धन्यवाद🙏
हम इन सबको निभा तोह रहे है पर इसका मूल कारण जाने बिना और यही वजह है जिसकी वजह से कई शर्मसार घटनाए हो चुकी है। हम लोगो को जगाने के लिए रायबहादुर तोह बने हुए है परंतु उसे अपनी निजी जिंदगी में ढाल नही पा रहे,ढालेंगे भी कैसे हमे पता तो हो कि आखिर ये है क्या। हमें पता ही नही है ये जातियां है क्या कहाँ से आई है क्यों है ये जातियां। बस अंधाधुन्द उनका पालन कर रहे है। चलिए एक प्रकाश डालते है।
जातियां प्राचीन काल मे हमारे विद्वानों ने कर्म व्यवस्था के हिसाब से बनाई थी।
जैसे - 1)शूद्र- इस वर्ण में उन लोगो को डाल गया था जो शारीरिक श्रम करने में अत्यंत समर्थ थे,और काम करने में काफी आगे थे और मेहनत करते थे, परंतु इन्हें पुराणों का या यूं कह ले सामाजिक ज्ञान उतना नही था। ये थे जो शूद्र वर्ग में आए।
2)वैश्य-इस वर्ग में उन लोगो को रखा गया जो लेन देन में कुशल थे और लेखा जोखा रख सकते थे।
3)क्षत्रिय- इस वर्ग में वो लोग आए जो विचारशील थे,जिनमे त्याग की भावना थी,जिनको अपने जीवन से प्रेम न था, देखा जाए तोह हमारे देश का हर एक सैनिक क्षत्रिय है चाहे उसकी जाती कोई भी हो।
4)ब्राह्मण-इस वर्ग में उन लोगो को रखा गया था जो कामनाओं से मुक्त थे एयर जो लोक हित के लिए अपना जीवन जीते थे।
हमे भूलना नही चाहिए कि हमारे राष्ट्रपति भी एक नीचे परिवार से है ,आज हमारे देश का सबसे युवा आई ए एस अधिकारी एक रिक्शा चालक का पुत्र है, हमारे फ़िल्म के महान अभिनेता नाना पाटेकर जैसे कुछ लोग बड़े ही महत्वपूर्ण उदाहरण है।
कभी भी कोई विशेष वर्ग नही हुआ करता था लोगो को उनके कर्मों के हिसाब से हर वर्ग बांटा गया था। लेकिन आज हमने उपज वर्गीकरण कर लिया है अपने आपको ऊंचा नीचा बना लिए है। जानवरो जैसे कृत्य करके हम खुद को ऊंची जाती का मान रहे हैं, लेकिन सच तो यह है कि चाहे कोई व्यक्ति शुद्र हो,ब्राह्मण हो,क्षत्रिय हो या फिर वैश्य हो सबको अपनी काबिलियत और काम करने की क्षमता के अनुसार बांटा गया था।
और ऐसा जरूरी नही है कि ब्राह्मण के घर ब्राह्मण ही पैदा हो या शूद्र के घर शुद्र,व्यक्ति की जाती उसके किसी परंबद्ध परिवार में पैदा होने से नही होती वरन उसके कर्मो से होती है।
ये समय है इन सब रूढ़िवादी मान्यताओं को तोड़ कर चीज़ों का सही मतलब समझ कर हम अग्रसर हो अपने उत्थान के लियेऔर अपने साथ देश और संसार का उत्थान करे। जातिवाद भूल कर "सब एक है" का नारा उठा कर आगे बढ़े।
आशा करता हु इसे सिर्फ पढ़ा न जाए लोगो को समझाया जाए और क्रांति लाई जाए।
सम्पूर्ण क्रांति अब नारा है
भावी इतिहास तुम्हारा है
ये नखत अमा के बुझते हैं
सारा आकाश तुम्हारा है।
आपके विचारों का खुले हृदय से स्वागत है।
धन्यवाद🙏
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