कुछ दिन पहले मैं हरिद्वार स्टेशन पर तकरीबन 2 महीने बाद उतरा था। आखिर कॉलेज की पढ़ाई दोबारा जो शुरू होगयी थी। मैं मन में शेख चिल्ली जैसे ख्वाब बुन रहा था कि कैसे जाऊंगा बैग रखूँगा, मस्त आराम करूँगा और जी भर के अपने यार दोस्तों के साथ गप्पे लड़ाऊंगा। इतना सोचते सोचते आगे बढ़ ही रहा था कि एकाएक कहीं से आवाज आई- "भगवान के नाम पर कुछ दे दे रे, भगवान तेरा भला करें। इतनी धूप में 35 किलो के दो झोले लेकर चल रहा था, मुझे उसकी ये बात कुछ मज़ाक जैसी लगी। खैर मैंने उसे पैसे देने के बजाय अपने साथ बैठाकर थोड़ा खाना खिलाया और आगे बढ़ा। मन अजीब सा प्रसन्न हो रहा था, एक तो मैं हरिद्वार में था दूसरा किसी भूंखे को खाना खिलाया, ऊपर से हरिद्वार की भक्ति वाली खुमारी थी की अचानक मेरी नाक को एक खुश्बू ने धमाकेदार सलाम ठोका मैं पहले तो हिला, कुछ खाँसा और नजर घुमाई तो देखा एक कोने में कुछ मेरे उम्र के 5-10 हट्टे कट्टे नौजवान, बजाकर भोलेनाथ का गाना, भर के चिल्लम, भट्टी बन उसे फूंके जा रहे थे। मुझे बड़ा झटका लगा, इसके पहले मेरा मन और दार्शनिक होता मैंने सोचा यह तो फैशन है और इसके बिना समाज में इंसान कूल कहाँ? मैं आगे बढ़ा और बढ़ते ही देखा एक कचरे के ढेर के पास एक मटमैले रंग की शर्ट के साथ लगभग तहमद जैसी पैंट पहने और पीछे से क्रिकेट के 30 यार्ड वाले सर्किल जैसा टकला लिए, मुंह में सुट्टा दबाए, कचरे के ढेर पर दे दे कर जोरदार पेशाब करे जा रहा था, और उसके पास सरकारी दफ्तर के भीड़ जैसे उसके अगल बगल मक्खियां मंडरा रही थीं। मुझे अचानक जिस ट्रेन से मैं आया था उसकी हूबहू सूरत उस आदमी में दिखी। धुआं उड़ाता पानी छोड़ता और रोब में खड़ा था और साथ सवारियां जैसी भिनभिनाती मक्खियां।
मैं काफी थक चूका था तो न ज्यादा सोचने की हिम्मत थी न ही मन। मैं आगे बढ़ा और ऑटो वाले से पूछा भैया यूनिवर्सिटी चलोगे? ऑटोवाले ने मुझे देखा मेरी हालात पर बिना तरस खाए, दो काश बीड़ी के लिए और पूरी शान में कहाँ 250 रूपए, मैंने ऑटोवाले से तौबा की और आगे बढ़ गया। और फिर इन बीड़ी सिगरेटों के सिलसिले की मार झेलता रहा और उस धुंए के बीच बॉलीवुड के एक्शन फिल्म के नायक जैसे उसमे से निकल रहा था।
इस बीच तमाम बार मैंने कपाल भांति की, बस वो थोड़ा मॉडर्न वाला था। मुझे आभास हुआ की जिस भूमि पर अगरबत्ती का धुआं और पुष्पों की महक होनी चाहिए वहां यह धुआं। क्या यह इंसान स्वयं के साथ, पृथ्वी के साथ और हरिद्वार के नाम के साथ न्याय कर रहा है? खैर मैंने भी आपको ज़रा सी बात बताने के लिए तमाम कहनी सुना डाली। खैर सोचियेगा आप भी और अगर आप भी इंसान ट्रेन हैं तो जरूर बताइयेगा।
