जाग जाओ मेरे नौजवानों, कब तक वैलेंटाइन्स डे ही याद रखोगे। कभी अपने देश की खाकी वर्दी पहने -47° में खड़े उस नवजवान को याद किया करो तो शायद तुम्हारे याद करने से ही उसे सर्द हवाओं से राहत मिले।
आज कारगिल विजय दिवस है। यों गुजरते हुए मैंने किसी से पूछ लिया आज क्या है? ब्रहस्पतिवार बोलकर लोग आगे बढ़ गये। मैं स्तब्ध था और दुखी भी। हैरान भी और परेशां भी। याद है आपको आज के दिन हमारे देश के नवजवानों ने पाकिस्तान की सेना को वापिस उनके बंकरों में खाड़ेदा था। तकरीबन 60 दिन तक चले इस महायुद्ध में न जाने कितने ही माँ के लालों ने अपनी जाने गँवाई थी। कोई लाल माँ से मिलते मिलते बिछड़ गया, कोई कल ही आया था फिर भी उसका साथ छूट गया। किसी का सुहाग चार दिन में उजड़ गया। कारगिल में लड़ने वाले शहीदों को हमारी सरकार ने कहा था कि आपको गोली भी लगे तो उफ्फ न करना। हमारे जवानों ने यह जिम्मेदारी बख़ूबी निभाई। पर हमें क्या हमारे घर का थोड़ी था कोई। अजी वो सेना में हैं काम यही है तनख्वा भी तो इसी की पातें हैं।
ठीक है मान लिया, पर क्या हम इतने संवेदनहीन हैं कि हमारे पास 2 मिनट का समय नहीं है कि हम उन शहीदों को याद कर सके। गर्लफ्रेंड का बर्थडे, कुत्ते का बर्थडे, सालगिरह ये सब याद रहता है हमें। पर अक्सर हम 26/11, 26 जुलाई, 15 अगस्त, 26 जनवरी जैसी तारीख भूल जाते हैं। तारिख तो ठीक आधे युवाओं को यह तक नहीं पता की इन दिवसों की विशेषता क्या है। खैर यह तो बस कहने सुनने की बातें हैं, आम बातें है। कौन फ़िक्र करता है इन सब चीजों की। होता रहता है। और तो और दुःख तब और होता जब हमारे देश के जानेमाने समाचार पत्र, हमारे जवानों की याद में एक पन्ना मात्र लिखना भूल जाते हैं। न जाने कब तक चलेगी यह वीडम्बना देश की।
अब क्या ही कहानी सुनाऊ आपको कारगिल की। कुछ पंक्तियों में समेटता हूँ-
गर्व है ऐसी माटी पर
जिसने वीरों को जन्म दिया
जो खेल गये खून की होली
जान हथेली पर रख कर
सलाम है
अभिमान है
गुमान है
मुझे मेरे हिंदुस्तानी
और
मेरे हिंदुस्तान पर।
