सब कुछ छोड़ छाड़ कर हम लखनऊ के नए मोहल्ले में आगये थे।3200 स्क्वायर फ़ीट के मकान को अलविदा कर 350 स्क्वायर फ़ीट के घर में कदम रख चुके थे, पहले कॉलोनी में रहते थे अब मोहल्ले में अपना आशियाना है। बस सुकून इस बात का है कि छत अपने नाम की है।
इस मोहल्ले में आये तकरीबन हमे 3 महीने हो चलें हैं, 350 स्क्वायर फ़ीट के हमारे घर मे कुल मिलाकर ऊपर नीचे डब्बे जैसे 4 कमरे हैं। मकान के सामने LDA का पार्क है जिसमे एक नीम का पेड़ है और उस पेड़ पर बगल में रहने वाली एक नकचढ़ी बुढ़िया का एकाधिकार है। उस पेड़ से कुछ दूरी पर ही कदंब पेड़ है जिसकी enquiry अभी हम कर नहीं पाए हैं।
पार्क के दूसरे छोर पर एक मंदिर है जिसमे हर शनिवार और मंगलवार की शाम 6 बजे से 8 बजे तक मोहल्ले और पास पड़ोस की महिलाएं कीर्तन करती है और सुबह आपस मे गली गलोच भी कर लेती हैं। माँ कहती हैं मोहल्ले वालों में आपस मे एकता बहुत है पर हमें ऐसा नही लगता।
मोहल्ले में 5-6 कुत्ते हैं टाइगर, चीकू, बघीरा, डोडो और दो अनजान कुत्ते हैं, बेहद शांत और एक है हमारी प्यारी बसंती। चीकू की एक टांग बचपन से खराब है पर उसकी वफादारी और daring गजब की है। टाइगर थोड़ा चिल्बिल्ला है, मोहल्ले का गबरू है आस पास की गलियों में उसकी धाक है, बाकी कुत्ते उससे थोड़ा दबते है पर वो बसंती से थोड़ा दबता है। बघीरा थोड़ा डरपोक किस्म का है पर पिछले कुछ दिनों से बसंती का बचा हुआ खाना खा खा कर कुछ तंदरुस्त हुआ है। और अब कॉन्फिडेंस से लबरेज रहता है।
ये सारे गली के ही देसी कुत्ते हैं पर मजाल है कोई बाहरी परिंदा मोहल्ले में पर मार जाए।
हमारे घर के सामने वाले पार्क में रात में लगभग 15-20 गाड़ियां खड़ी होती है। पार्क कम कार पार्किंग ज्यादा लगता है। मोहल्ले में दो परिवार मुस्लिमो भाइयो के हैं, दोनों में बंटवारा हो चुका है। हमारे घर से दाईं ओर तकरीबन पैंतालीस डिग्री पर एक लाल रंग का मकान है जो लगभग खण्डहर हो चुका है और लखनऊ रेजीडेंसी की किसी टूटी इमारत का हिस्सा लगता है। पर उस घर मे बाकायदा एयर कंडिशनर लगा है, उसी घर के बच्चों ने चीकू और डोडो को पाल, दोनों ही कुत्तों को खुजली रोग है, पर पिछले कुछ दिनों से डोडो की हालत में सुधार है, डोडो लगभग 7-8 महीने की कुतिया है अजर चीकू लगभग 1 साल का कुत्ता है। अक्सर ये दोनों बच्चे डोडो और चीकू को टहलाने निकलते हैं, बच्चे अभी छोटे है तो उनको इतनी समझ नहीं है अक्सर डोडो और चीकू उन बच्चो द्वारा मोहल्ले भर में घसीटे जाते है और अक्सर उनकी पटखनी लगती रहती है। शायद उन बच्चों की माँ नहीं है या शायद मैंने आजतक उन्हें देखा नही। हमारे घर के बगल वाला घर हमारी ही जाती के किसी महाशय का है पर तमाम दिनों से खाली पड़ा है, सुनते है पहले यह ब्वॉयज़ हॉस्टल हुआ करता था, पर अब मालिक इसे बेंच कर दिल्ली में रहना चाहते हैं।
मोहल्ले की गली में घुसते ही पहला मकान एक अधेड़ उम्र की औरत का है, उसकी आवाज कुछ भर्राई हुई सी है, आगे के दो दांत आधे आधे टूटे से हैं, रंग दबा हुआ है और चेहरे पर कुछ दाग हैं। अक्सर मैक्सी और एक लाल दुप्पटा गले में लपेटे अपनी बालकॉनी और मोहल्ले की दूसरी औरतों के साथ बैठा करती है। उसका एक लड़का है डील डौल शरीर है छोटे भीम वाले कालिया जैसा हाँ वो बिल्कुल वैसा ही दिखता है, उसकी उम्र लगभग 16-17 बरस होगी और अक्सर अपनी लाल कमीज में मोहल्ले के दूसरे लड़को संग घर घर के चबूतरे पर pubg खेला करता है, उसकी माँ उसपर अपनी भर्राई आवाज में चिल्लाया करती है।
हमारे घर से बाईं ओर जुड़े हुए घर मे एक परिवार रहता है, वे ज्यादा किसी से मतलब नहीं रखते यहां तक इतना बता पाना भी कठिन है कि उस परिवार में कुल सदस्य कितने हैं। हां पर अंकल अक्सर अपनी छाती पर छेद वाली बनियाइन में अपनी छत पर टहलते नज़र आते हैं और बड़ी चतुरता से सड़क पर आने जाने वालों पर नजर रखते हैं।
हमारे घर के दरवाजे से साठ डिग्री बाएं ओर एक और घर है, जिनकी दो गाड़ियां सामने वाले पार्क में खड़ी होती है, स्विफ्ट डिजायर और वेगनआर। दो भाई है दोनों ड्राइवर हैं। ये वही घर है जिसमे पांच फुट की एक बेशरमा के पेड़ से भी दुबली पतली कुरूप औरत रहती है उसी का पार्क में लगे नीम के पेड़ पर एकाधिकार है। बुढ़िया के एक पोता है एक पोती, पोता अक्सर कम दिखाई पड़ता है। पोती अपनी दादी की पक्की चेली है, अपने घर की बालकनी में खड़े होकर मोहल्ले में होने वाले सारे क्रिया कलाप वो दादी को आंखों देखी सुनाती है और कहीं कोई उसकी गाड़ियों के पास फटक भर जाए दादी को चिल्ला चिल्ला कर खबर हो जाती है और दादी अपना सारा काम छोड़कर बस भागी भागी सड़क तक देखने चली आती हैं। पोती की उम्र लगभग 11-12 साल है, नाम मुझे नहीं पता पर हाँ उस सामने लाल वाले घर मे रहने वाले लड़के संग उसकी खूब बनती है, दोनों दिनभर खूब खेला करते हैं। वो लड़का इसको खुश करने को जो बन पड़ता है करता है। कभी पहिये वाले जूते पहन कर सड़क पर भागा फिरता है तो कभी अपनी नन्ही साइकल पर करतब दिखाता है। लड़की भी उसके साथ खेलने को खूब उतावली रहती है।
पार्क के दूसरे कोने में दो पतंग बाज लौंडे रहते हैं और उस घर के नीचे एक सब्जी वाला, सब्जी वाले कि औरत और उसकी 2 जवान बेटियां रहती हैं। दोनों की उम्र लगभग 23-24 साल है...