सोनू जानते हो " ताऊ जी को paralysis का अटैक पैड गया, मां ने फ़ोन रखते ही चिंता भरी आवाज में सोनू से कहा, सोनू अपने फोन में भिड़ा हुआ था और उसने हम्म कह कर टाल दिया, फिर अचानक ठिठक कर पूछा हें? क्या हुआ?
माँ ने लम्बी गहरी सांस ली और कहा विनोद के पापा को आज पैरालिसिस का अटैक आगया आज दोपहर में नल पर नहाने गए थे वही बेहोश होकर गिर गए, बांय तरफ का सारे हिस्से ने काम करना बंद कर दिया है।
सोनू ने एक ठंडी आह भरी और आपने अंदर के द्वंद से लड़ने लगा। कि वो कर भी क्या सकता है, उसके हाथ मे कुछ है ही नही बस ईश्वर से प्रार्थना करने के सिवा। और यही सच भी है आदमी कितनी भी कोशिशें कर ले पर ऊपर वाले के आगे किसकी चलती है पर इंसान का कर्तव्य है कोशिश करते रहना।
सोनू के पिताजी का देहांत अभी कुछ माह पहले ही हुआ था, बेचारे कोरोना की लहर से लड़ते लड़ते हार गए, या शायद इस लड़ाई में सरकार से लड़ते हुए हार गए, पर हार जरूर गए थे।
सोनू को आज तक यह भी नही पता कि उसके पिताजी का देहांत हुआ किन कारणों से, कोरोना से संक्रमित थे वह तो ठीक है पर हालत कब बिगड़ी? कब हुआ? उसे इसकी खबर क्यों नही थी। जितने रिश्तेदारों से मिलता है सब अपने अपने सिरे से बताते है कि क्या हुआ था, और सबकी कहानियों में उसे लूप होल नज़र आते हैं।
जब सोनू के पिताजी बीमार थे तब सोनू बाहर नौकरी पर था उसे विश्वास था उसके पिताजी ठीक हो जाएंगे और फिर दूसरे कमरे से बैठ कर आवाज से देंगे, भैया...!! और फिर हल्की आवाज में कहेंगे आज शाम को स्टाफ में शादी है मिश्रा जी के बेटे की चलोगे? कनिका, कुहू से भी पूछ लो, मम्मी को मत बताना अभी।
पर ऐसा हुआ नही, जब वह आखिरी समय मे घर आया तब डेढ़ घंटे पहले ही उसके पिताजी इस दुनिया को अलविदा कह गए थे। उस दिन जब वह सुबह-सुबह बस से उतर कर सड़क पार कर रहा था तब उसके मामा और मौसा मिल गए उसे चुप चाप गाड़ी में बिठाया और घर की ओर चल दिये, सोनू इन सब से बेखबर था।
वह घर पहुँचा उसने अपना बैग रखा और दौड़ कर अपनी माँ के पास पहुँचा, माँ कमरे में पिताजी के पास बैठी थी, बदहवास। पिताजी एकदम शांत लेटे थे एक हल्का महरून रंग का कंबल ओढ़े उस कंबल पर तमाम फूल पत्ति बनी थी, जितनी बहार उस कम्बल में थी उतनी ही उदासीनता उस माहौल में थी। सोनू को एक पल के लिए लगा उसके पिताजी नही रहे पर उसे भरोसा था कि उसके साथ ऐसा नही हो सकता। इतना गंदा मज़ाक प्रकृति उसके साथ नहीं कर सकती अभी तो वह अपने सपने जीने के लिए बस तैयार हो रहा था, अपने पिताजी को हवाई जहाज में बिठाने के सपने बुन रहा था। और शायद हर इंसान इतना ही आशावादी होता है कि उसके साथ नहीं होगा कुछ। वह हिम्मत कर माँ की ओर मन भर के मुस्कुरा दिया। और दरवाजे के पास जाकर अपने जूते खोलने लगा। एकाएक उसका फ़ोन बजा तो सचिन भैया फ़ोन कर रहे थे उसने फ़ोन उठाया और बोला, " हां भैया, प्रणाम मैं घर आया हु पापा जी की तबियत सही नही है अभी फोन करता हूँ।" इतना कह कर उसने फोन काट दिया। जैसे ही वह जूते उतार कर मुड़ा उसके मामा और मौसा ने उसके कंधे पर हाथ रख कर ज़ोर से दबा दिया। इतना सोनू के लिए काफी था। सोनू का पैर सूज चुका था, और उसके पैर में ज़ोर की टीस मच रही थी। अभी लगभग दस दिन पहले उसका एक्सीडेंट होगया था। वह लंगड़ाते हुए माँ के पास पहुँचा और उन्हें बस देखता रहा और माँ बेजान आंखों से उसे। सोनू ने अपने सारे आंसू दबा लिए जैसे वह जानता ही नही था की क्या हुआ। उसने धीमे से हिम्मत कर के अपने मामा से पूछा मामा क्या हुआ? मामा कुछ नही बोले, कहा कि कनिका, कुहू को बुला कर एक बार दर्शन करा दो।
सोनू के भीतर हिम्मत नहीं थी कि वह सीढियां चढ़ कर जाए और अपनी बहनों को यह बता सके कि बेटा आज के बाद से तुम्हारे सर पर पापा का साया कभी नही होगा।
खुदको को बहुत ढांढस बंधा कर सोनू मुस्कुराता हुआ छत पर दौड़ गया, और अपनी बहनों को जगाने लगा और जगा कर बोला उठो बच्चों मैं आगया, चलो दोनों लोग नीचे आजाओ फटाफट, उसने बहुत हिम्मत जुटाई पर सोनू हिम्मत हार गया, नही बता पाया कि बात क्या है।
थोड़ी देर में दोनों बहनें नीचे आगयी, सोई सोई आंखे एकदम बेखबर, उसने अपने से छोटी वाली को कैसे भी हिम्मत कर के बता दिया, पर सबसे छोटी वाली को क्या बताता, कैसे बताता, कितने सवाल करती वो, कहाँ से देता उन सवालों के जवाब।
सोनू एक बार फिर मुस्कुराया और दोनों से बोला आओ पापा के साथ फोटो खिंचा लो। उसके हाथ कांप रहे थे, दिमाग मे लाखों, करोड़ो सवालों का जत्था उसके सर में जैसे खून को जाम कर रहा हो।
तीनो बच्चे अपनी माँ के बगल बैठ गए और अपने पिता के साथ आखिरी फोटो खिंचा के खड़े होगये, सबसे छोटी वाली अब भी बेखबर थी वह बोली, "भाई मुझे बहुत नींद आ रही है मैं सोने जा रही हूँ", सोनू बोला, "एक काम करो ब्रश कर के आ जाओ फिर सो जाना।" ऐसा कर सोनू ने अपने लिए वक़्त मांग लिया कि अब जब वो ब्रश कर के नीचे आएगी तो उससे पक्का बता देगा, तब तक नीचे एम्बुलेंस आ चुकी थी और छोटी वाली बहन भी कुछ 2 मिनट बाद नीचे आगयी सबने उसके पिता जी को टिकटी पर लिटाया और सोनू ने अपने दाहिने कंधे पर अपने पिता का मृत शरीर रख लिया, जिन कंधो पर वह कभी खेला था आज उनको अपने कंधे पर रखे लिए जा रहा था। उसकी सबसे छोटी वाली बहन बस इतना कह पाई, " "डोंट टेल मी डिस," उसके चेहरे पर यही भाव था कि मेरे पापा के साथ ऐसा नही हो सकता। पर सोनू के पास न जवाब था न हिम्मत बस अपने कंपकपाते कंधो पर वह अपने जा चुके पिताजी के भारी शरीर को उठाए जा रहा था, वह इतनी तेज भागना चाहता था अपने पिता को लेकर जहां उनसे वो बैठ कर दो मिनट बात कर सके, पर वो तो इतना अभागा था कि अपने पिता से न तो आखिरी पर 2 शब्द बोल पाया, शब्द बोलना तो दूर उन्हें छूना तक मना था...।
एकाएक सोनू की मां रोटी बेलते हुए बोली थोड़ा कम फोन चलाया करो सुन लिया करो। उसका ध्यान अचानक टूटा और बोला हम्म, अपने हाथ मे क्या है मम्मी जी बस ऊपर वाला ठीक कर दे सबको जल्दी यही प्रार्थना कर सकते हैं हम तो बस कोशिश कर सकते हैं।
हफ्ते भर बाद चेहल्लुम के दिन माँ की छुट्टी थी माँ बोली चलो ताऊजी जी को अस्पताल में देख आते हैं, सब फाइनल होगया ताऊजी सीतापुर में एक अस्पताल में भर्ती थे, अब हालात में कुछ सुधार था पर ब्लड प्रेशर की समस्या बनी हुई थी। जब सोनू अस्पताल पहुँचा तो ताऊजी को देख कर बिल्कुल उसके सामने उसके पिताजी का चेहरा नाच गया कैसे आंखे, नाक, माथा, चेहरा, चट्ट गोरा रंग सब मिलता था बस उसके पिताजी का मुंह थोड़ा गोल हुआ करता था। सोनू ताऊजी को समझा रहा था कि वह भी अपना ध्यान रखे ज्यादा नामक- चीनी खाने की जिद्द न करें, ताऊजी का बेटा विनोद जनरल वार्ड में बैठा सोनू की माँ के सामने रो रहा था और माँ उसे ढांढस बंधा रही थी कि ईश्वर पर भरोसा रखो अपना ध्यान रखो, खाते पीते रहना , किसी चीज़ की जरूरत हो तो कहना और पापा गुस्सा करें तो बुरा मत मानना, अपना धर्म निभाते रहो पिता की सेवा करने का सुअवसर सबको नहीं मिलता... यह सुनते ही सोनू बात करते करते अचानक ठहर गया..। इतना सुनते ही एक पल को सोनू का सर ऐसा चकराया मानो अभी वह अस्पताल की फर्श पर ही धराशाही हो जाएगा।
सोनू ने मां से कहा चलें मम्मी जी घर भी पहुँचना है और हमे अभी हज़रतगंज भी जाना है....।
अत्यंत मार्मिक....मानों सारे दृश्य आँखों मे तैर रहे हो...भैया...😞😞😞
ReplyDeleteMarmik Jeevesh, jise bhugatbhogi hee sahi se feel kar sakta Hei!!
ReplyDeleteजीवेश भैया आपने बहुत ही भावनात्मक लेख लिखा है इसके ऊपर कुछ भी कह पाना बहुत ही मुश्किल हो रहा है हम बस इतना ही कह सकते हैं कि हम सब आपके साथ हैं हमेशा साथ हैं हर स्थिति में साथ है हम सब साथ हैं सब ठीक हो जाएगा
ReplyDeleteWahhhh 😇😇😇
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