कार्य कोई भी हो चाहे वह बड़ा हो या छोटा फर्क नहीं पड़ता परंतु किसी भी कार्य के सफलतापूर्वक संपन्न होने के लिए एक महत्वपूर्ण, जिम्मेदार, लग्नशील और कर्मठ व्यक्तियों के संघटन की आवश्यकता होती है। भले उनका चेहरा सामने आए चाहे न आए, यह ठीक उसी प्रकार है कि किसी फिल्म के बनने के बाद सिर्फ अभिनेता या अभिनेत्रि ही पर्दे पर दिखाई देते हैं परंतु उसके पीछे न जाने कितने की व्यक्तियों की मेहनत रहती है और अगर वे न हो तो निश्चित ही यह कार्य असंभव है, उसी का एक जीत जागता उदाहरण हमे शांतिकुंज द्वारा नागपुर में आयोजित युग सृजेता युवा संकल्प समारोह में देखने को मिला। यह कार्यक्रम विशाल स्तर पर आयोजित किया गया। अमूमन कोई भी विशाल कार्यक्रम अगर आयोजित किया जाता है तो मजदूरों की आवश्यकता पड़ती है, परंतु इस कार्यक्रम की आश्चर्यजनक बात यह है कि शुरुआत से अंत तक के कार्य मे किसी भी मजदूर की आवश्यकता नहीं पड़ी, कार्य स्वयंसेवको द्वारा ही शुरू एवं संम्पन्न किआ गया। कार्यक्रम में रेला आया पर शायद ही किसी को अव्यस्था महसूस हुई होगी या शायद ही किसी को कोई असुविधा हुई होगी, चाहे वह ठहरने की व्यवस्था हो या भोजन या संचालन की ही क्यों न हो कार्य इतने अभूतपूर्व व सुलझे हुए ढंग से किआ गया कि किसी को यह एहसास ही नहीं हो पाया कि वह घर से दूर है। इतना ही नहीं प्रांगण को भव्य झाँकियों से रचनात्मक रूप से सजाया गया। एक ओर जहाँ युवा कार्यक्रम ने युवाओँ का सृजन एवं संकल्प दिलाने का कार्य किया वहीं उन भव्य झाँकियों ने मौन रहकर भी न जाने कितने ही संदेश दिए। रंगोली से बना भारत देश का नक्शा, सजल शृद्धा- प्रखर प्रज्ञा की प्रतिमान जो पूर्णतः शांतिकुंज हरिद्वार की स्मृती करा रहा था, भव्य भारत माता की मूर्ति जो रह रहकर देशभक्ति की भावना हर युवा में जाग्रत कर रही थी, और साथ ही वसुदेव कुटुंबकम का संदेश देती हुई मशाल और ग्लोब। इतना ही नहीं परिजनों द्वारा बनाए गए आदर्श ग्राम मॉडल, स्वावलंबलन केंद्र, निर्मल गंगा मॉडल, प्रियदर्शनी, जीरो मील स्तम्भ व व्यसनमुक्ति का संदेश देता स्याह पुतला। कार्यक्रम में शायद ही कोई ऐसी वस्तु होगी जो किसी भी प्रकार का संदेश न दे रही हो, रहने के पंडाल से लेकर कार्यक्रम होने वाले प्रांगण तक। और हमे भी शायद ऐसे कई कार्यक्रम आयोजित करने और देश के तमाम हिस्सो से युवाओं को संगठित करने की आवश्यकता है तभी हम राजगुरु, सुखदेव, चंद्रशेखर आजाद, नेताजी सुभाष के सपने का भारत बनाने में सफल होंगे और इस मुहिम में गायत्री परिवार विश्व का नेतृत्व कर रहा है और सफलता के पायदान चढ़ रहा है जिससे भारत ही नही अपितु सारा विश्व महानता की ओर अग्रसर है।
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